सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय ‘अमरूद सिटी’ के रूप में पहचान बना रहा है। 18-19 जनवरी को राष्ट्रीय अमरूद महोत्सव, 10 हजार से अधिक किसानों की भागीदारी की उम्मीद
- रुसेन कुमार द्वारा
राजस्थान का सवाई माधोपुर, जो अब तक रणथंभौर और बाघों की वजह से देशभर में ‘टाइगर सिटी’ के रूप में पहचाना जाता रहा है, अब अपनी एक नई पहचान गढ़ने की ओर बढ़ रहा है—‘अमरूद सिटी’। शहर के 263वें स्थापना दिवस को इस बार अमरूद महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा के साथ प्रशासन ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर के अमरूद महोत्सव की तैयारी शुरू कर दी है। यह आयोजन 18 और 19 जनवरी 2026 को जिला मुख्यालय के दशहरा मैदान में होगा, जिसमें देशभर से 10 हजार से अधिक किसानों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
सवाई माधोपुर राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख शहर है, जो राज्य की राजधानी जयपुर से लगभग 140 से 165 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए ट्रेन सबसे तेज़ माध्यम है जिससे लगभग 2 घंटे लगते हैं, जबकि सड़क मार्ग (NH-52 और NH-23) से कार या बस द्वारा लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है। यह शहर विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान और ऐतिहासिक रणथंभौर किले के लिए जाना जाता है।
उत्सव के केंद्र में अमरूद
सवाई माधोपुर शहर का स्थापना दिवस हर साल जिले के लिए एक सांस्कृतिक और सामुदायिक उत्सव की तरह होता है। लेकिन इस बार आयोजन को एक कृषि-आर्थिक पहचान देने की कोशिश की जा रही है। रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर काना राम की अध्यक्षता में शहर के गणमान्य नागरिकों, व्यापार संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक हुई, जिसमें तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई।
कलेक्टर ने इसे “सवाई माधोपुर के लोगों का अपना उत्सव” बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे अपने घर, दुकानें और बाजार फूल-मालाओं, रोशनी और रंगोलियों से सजाएं, दीप प्रज्ज्वलन करें और पूरे मन से आयोजन में सहभागी बनें।
सवाई माधोपुर के अमरूद की खासियत
‘मेवा’ नाम से देशभर में पहचान
सवाई माधोपुर का अमरूद सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि जिले की कृषि पहचान का एक मजबूत आधार बन चुका है।
स्थानीय स्तर पर इसे ‘सवाई माधोपुर का मेवा’ भी कहा जाता है। मिठास और गुणवत्ता के कारण यहां का अमरूद दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों तक पहुंचता है।
यहां 10 से 15 किस्मों के अमरूद पैदा होते हैं, जिनमें बरफखान गोला और सफेद अमरूद का नाम खास तौर पर लिया जाता है।
‘अमरूद सिटी’ की दिशा में बड़ा कदम
किसानों को बाजार, तकनीक और नए एमओयू की उम्मीद
जिला प्रशासन का मानना है कि यह महोत्सव:
- किसानों को नई तकनीक और नई किस्मों से जोड़ेगा
- बिचौलियों पर निर्भरता घटाकर किसानों को सीधा लाभ दिलाने में मदद करेगा
- अमरूद आधारित नई यूनिट्स (प्रोसेसिंग/प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग) की संभावनाएं बढ़ाएगा
- जिले को एक नई पहचान देगा—टाइगर सिटी के साथ-साथ अमरूद सिटी
इस आयोजन से अमरूद और उसके उत्पादों से जुड़े नए एमओयू होने की संभावनाएं भी जताई गई हैं, जिससे स्थानीय अ
उत्पादन और कारोबार के बड़े आंकड़े
15 हजार हेक्टेयर से 30 हजार हेक्टेयर तक का लक्ष्य
जिले में अमरूद की खेती तेजी से फैल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- वर्तमान में जिले में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अमरूद की खेती हो रही है।
- आने वाले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र 30 हजार हेक्टेयर से अधिक होने का अनुमान है।
- जिले में सालाना लगभग 4 लाख मैट्रिक टन अमरूद का उत्पादन होता है।
- इससे सालाना 6 से 7 अरब रुपये के कारोबार का आकलन किया गया है।
इन आंकड़ों को देखते हुए राज्य सरकार ने अमरूद को जिले के ‘पंच गौरव’ में शामिल किया है। इसी पृष्ठभूमि में स्थापना दिवस पर उत्तर प्रदेश के आम महोत्सव की तर्ज पर अमरूद महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।
अमरूद महोत्सव
किसानों के लिए तकनीक, बाजार और मुनाफे का मंच
प्रशासन के अनुसार यह महोत्सव प्रदर्शनी होने के साथ साथ किसानों के लिए व्यावहारिक सीख, तकनीकी जानकारी और मार्केट लिंक का मंच भी बनेगा। आयोजन में अलग-अलग सत्र होंगे।
जिन विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे उनमें शामिल होंगेः
- अमरूद उत्पादन की उन्नत तकनीकें
- नई किस्मों की जानकारी
- प्रसंस्करण (Processing) और मूल्यवर्धन (Value Addition)
- बाजार की मांग, कीमतों और सप्लाई चैन
- बिचौलियों से बचकर सीधे लाभ पाने के मॉडल
- सरकारी योजनाओं और कृषि कल्याण कार्यक्रमों की जानकारी
अमरूद से बने उत्पादों की प्रदर्शनी
दो दिवसीय महोत्सव में करीब 150 से अधिक स्टॉल्स लगाए जाने की योजना है। इनमें शामिल होंगी:
- सवाई माधोपुर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जाने वाली अमरूद की किस्मों की प्रदर्शनी
- अमरूद उत्पादन में उपयोगी कृषि आदान (Inputs) की प्रदर्शनी
- अमरूद पौधों की नर्सरी और रोपण सामग्री
- फल प्रदर्शनी (Fruit Exhibition)
- अमरूद से बनने वाले उत्पादों की प्रदर्शनी: जूस, चिप्स, कैंडी, बार, जेली, बर्फी, लड्डू आदि
यह हिस्सा खास तौर पर उन किसानों और उद्यमियों के लिए उपयोगी होगा जो खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण यूनिट या एग्रो-बिजनेस की ओर जाना चाहते हैं।
ड्रोन का लाइव डेमो, स्मार्ट फार्मिंग मॉडल, ऑर्गेनिक-नेचुरल खेती और स्टार्टअप/एफपीओ मंच
महोत्सव में आधुनिक खेती के कई आकर्षण जोड़े जा रहे हैं, जैसे:
- ड्रोन का लाइव डेमो
- स्मार्ट फार्मिंग मॉडल और हाईटेक बागवानी
- जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, केमिकल-फ्री खेती के मॉडल
- कृषि स्टार्टअप्स और एफपीओ (Farmer Producer Organization) के जरिए नए उद्यमों की प्रस्तुति
- उन्नत कृषि उपकरणों और यंत्रीकरण की झलक
इसके अलावा, बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित करने की भी योजना है।
ICAR, KVK, APEDA समेत कई राष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी की तैयारी
महोत्सव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कई प्रमुख संस्थानों की भागीदारी बताई गई है/तैयारी की जा रही है, जिनमें शामिल हैं:
- आईसीएआर (ICAR)
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
- एपीडा (APEDA)
- सीआईपीएचईटी, लुधियाना (CIPHET)
- सीआईएसएच, लखनऊ (CISH)
- हिसार कृषि विश्वविद्यालय
इन संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों से संवाद करेंगे और खेती, बागवानी, प्रसंस्करण और विपणन पर व्यावहारिक जानकारी साझा करेंगे।
अतिवृष्टि से नुकसान, लेकिन भाव अच्छे
इस साल जिले में अतिवृष्टि के कारण अमरूद की पैदावार को नुकसान की बात सामने आई है। हालांकि, उत्पादन कम होने से बाजार में भाव बेहतर रहे, जिससे किसानों को मुनाफा मिला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- अमरूद का थोक भाव लगभग ₹25–₹30 प्रति किलो
- खुदरा/खुरदरा भाव लगभग ₹50–₹70 प्रति किलो
किसानों और व्यापारियों का कहना है कि पैदावार घटने के बावजूद अच्छे भाव ने नुकसान की भरपाई में मदद की है।












